Mai VeerBhumi Rajasthan Hu
मारवाड़ रे परगना री विगत जहां रची है
मरु देश रे रग रग में संस्कृति बसी है
मैं ऐसा प्रदेश महान हूं
देखो वह मैं राजस्थान हूं।
खेजड़ी की गोद में लहराता हूं
गोगा तेजा पाबू के गुण गाता हूं
मैं इस धरती के सुरो का अरमान हूं
वो रंगीला रूडा मैं राजस्थान हूं।
मैं वही गुरुओं का उपदेश हूं
मैं संत पीपा का संदेश हूं
मैं पंच पीरों का स्थान हूं
मैं आपका राजस्थान हूं ।
मैं उत्तर में खड़ा वह भटनेर हूं
दक्कन में अडीग मेवाड़ हूं
पूर्व में जाटों का सम्मान हूं
मैं मरुस्थल का स्थान हूं
प्यारे मैं राजस्थान हूं ।
मैं सांगा का अभिमान हूं
मैं प्रताप का स्वाभिमान हूं
मैं पद्मनी जोहर का स्थान हूं
मैं क्षत्राणियों का राजस्थान हूं।
मैं आमजन का सपना हूं
मैं परदेसियों का अपना हूं
मैं चंद्रवरदाई की राग हूं
मैं भाटो का राजस्थान हूं ।
मैं अभिमानी जन का नाशक हूं
मैं राणा कुंभा जैसा शासक हूं
मैं मुगलों का श्मशान हूं
मैं हल्दीघाटी वाला राजस्थान हूं ।
मैं कपिल मुनि की तपोभूमि
मैं दादू दयाल की वाणी हूं
मैं भारतवर्ष का खंड महान हूं
मैं वीरभूमि राजस्थान हूं ।
मैं दुश्मन पर जयकार हूं
मैं ओजस्वी सिंहो सी दहाड़ हूं
मैं वीर भूमि का "परमार" हूं
जी हां मैं "राजस्थान" हूं ।
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